सिडनी। ब्लैकटाउन वेस्टपॉइंट शॉपिंग सेंटर में हुई एक भयावह घटना ने खुदरा दुकानों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दो वर्षीय बच्ची अमायरा की आंख कपड़ों की दुकान में लगे लोहे के हुक से बुरी तरह घायल हो गई।
मां मॉरीन अहलूवालिया अपनी बेटी अमायरा और भाभी के साथ खरीदारी कर रही थीं, तभी यह हादसा हुआ। बच्ची अपनी मां के पास ही चल रही थी कि अचानक परिधान टांगने वाले लोहे के हुक उसकी आंख में जा लगा।
“उसकी पलकों को देखकर मेरा दिल बैठ गया। आंख से खून बह रहा था और पलक उलट चुकी थी,” मॉरीन ने बताया।
तुरंत पास के स्पेकसेवर्स क्लिनिक में ले जाने पर पता चला कि चोट कॉर्निया से बाल भर की दूरी पर रुकी है। डॉक्टरों के अनुसार यदि चोट कॉर्निया पर होती तो स्थायी रूप से आंख की रोशनी जा सकती थी।
हादसे के बाद भी दुकान प्रबंधन की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली। छह दिन बाद सिर्फ एक औपचारिक कॉल आया, लेकिन न तो सीसीटीवी फुटेज दी गई और न ही सुरक्षा मानकों पर कोई ठोस चर्चा हुई।
मॉरीन कहती हैं, “ये केवल हमारी गलती नहीं है। दुकानों की जिम्मेदारी है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए इंतज़ाम करें।”
2020 में कुछ बड़े ब्रांड्स जैसे के-मार्ट और टारगेट ने हुक्स के सिरों पर रबर और प्लास्टिक कैप लगाने शुरू किए थे, लेकिन अभी भी कई जगहों पर नुकीले हुक छोटे बच्चों की ऊंचाई पर लगे हैं।
“पूल के चारों ओर हम बाड़ क्यों लगाते हैं? बच्चों को बूस्टर सीट क्यों देते हैं? सब सुरक्षा के लिए। तो दुकानों में यह क्यों नहीं हो सकता?” मॉरीन ने सवाल उठाया।
मॉरीन ने अब न्यू साउथ वेल्स संसद में एक याचिका दाखिल की है जिसमें खुदरा दुकानों के लिए नए सुरक्षा मानक लागू करने की मांग की गई है। इस याचिका को लेबर सांसद स्टीफन बाली का समर्थन मिला है।
याचिका पर 20,000 हस्ताक्षर होने पर यह संसद में सुनी जाएगी।
जहां एक ओर कई लोग मॉरीन के समर्थन में सामने आए, वहीं कुछ ने जिम्मेदारी पूरी तरह मां पर डालते हुए आलोचना भी की। हालांकि मॉरीन का कहना है कि यह मुआवजे की बात नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा का सवाल है।
“अगर मेरी बेटी की आंख चली जाती तो कोई पैसा उसे वापस नहीं ला सकता था,” उन्होंने कहा।