सिडनी विश्वविद्यालय और एआई विवाद पर खबर

सिडनी विश्वविद्यालय और एआई विवाद पर खबर

सिडनी (ऑस्ट्रेलिया)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल ने शिक्षा जगत में नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। हाल ही में सिडनी विश्वविद्यालय की छात्रा तुबा शकील पर आरोप लगाया गया कि उनका निबंध एआई द्वारा लिखा गया है। विश्वविद्यालय की सॉफ्टवेयर प्रणाली ने उनकी असाइनमेंट को संदिग्ध करार दिया और उन पर नकल (प्लेज़रिज़्म) का आरोप लगा दिया।

छात्रा की लड़ाई

लेकिन तुबा ने हार मानने से इनकार किया। उन्होंने सबूतों और अपने लेखन प्रक्रिया को प्रस्तुत कर यह साबित किया कि निबंध उनका खुद का था, किसी मशीन का नहीं। उनका कहना था कि तकनीक की खामियों के कारण छात्रों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। आखिरकार उन्होंने विश्वविद्यालय के सामने अपनी बात रखी और आरोपों का सामना किया।

छात्रों की चिंता

सिर्फ तुबा ही नहीं, बल्कि कई छात्र जैसे वेन झोंग, सथसरा राडालियागोडा, विल थॉर्प और जैक क्विनलन ने भी एआई जांच प्रणालियों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह तकनीक अभी अधूरी है और इससे छात्रों की मेहनत पर गलत सवाल उठाए जा रहे हैं।

विश्वविद्यालयों की सख्ती

ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया के कई विश्वविद्यालय अब परीक्षाओं, निबंधों और शोध कार्यों में एआई-जनित सामग्री की पहचान के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन इस कदम से छात्रों और शिक्षकों के बीच अविश्वास का माहौल बन रहा है। कई मामलों में छात्रों पर बिना ठोस सबूत के कार्रवाई की जा रही है।

बहस जारी

यह मामला अब बड़े सवाल खड़े करता है—क्या शिक्षा जगत तकनीक पर ज़रूरत से ज्यादा निर्भर हो रहा है? क्या मशीनें सच में इंसानी सोच और मेहनत को सही से पहचान सकती हैं?
छात्रों का मानना है कि तकनीक का इस्तेमाल मदद के लिए होना चाहिए, न कि सजा देने के लिए।