सिडनी की छिपी शर्म: बच्चों की जबरन शादियों का चौंकाने वाला खुलासा

सिडनी की छिपी शर्म: बच्चों की जबरन शादियों का चौंकाने वाला खुलासा

ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स (NSW) राज्य से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां कम उम्र के बच्चों, खासकर किशोरियों, की संदिग्ध जबरन शादियों के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मामलों में कथित तौर पर “अनौपचारिक समारोह” उपनगरीय इलाकों के निजी घरों और पिछवाड़ों में आयोजित किए गए, जिनकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है।

कानून के खिलाफ प्रथा

ऑस्ट्रेलिया में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की शादी अवैध है। विशेष परिस्थितियों में अदालत की अनुमति के बिना नाबालिग की शादी नहीं हो सकती। जबरन विवाह को संघीय कानून के तहत गंभीर अपराध माना जाता है, जिसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है।

इसके बावजूद, अधिकारियों को ऐसे मामलों की जानकारी मिली है जहां कम उम्र की लड़कियों की शादी उनसे काफी अधिक उम्र के पुरुषों से कराई गई। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई बार यह विवाह समुदाय के भीतर दबाव, सामाजिक प्रतिष्ठा या पारिवारिक मजबूरी के कारण कराए जाते हैं।

“अनौपचारिक समारोह” पर सवाल

सूत्रों के मुताबिक, कुछ मामलों में विवाह समारोह कानूनी पंजीकरण के बिना निजी स्थानों पर आयोजित किए गए। ऐसे समारोहों को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाता, जिससे पीड़ितों की पहचान और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाता है।

बाल अधिकार संगठनों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

पीड़ितों के लिए सहायता

विशेषज्ञों का मानना है कि जबरन विवाह के मामलों में पीड़ित अक्सर भय, सामाजिक दबाव और जानकारी के अभाव के कारण शिकायत दर्ज नहीं करा पाते। सरकार और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि संभावित पीड़ितों को सहायता और कानूनी संरक्षण मिल सके।

पुलिस और सामाजिक सेवाओं ने लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार के जबरन विवाह या नाबालिग शादी की जानकारी मिले, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

समाज के लिए चेतावनी

यह मामला ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश में भी सामाजिक कुरीतियों के अस्तित्व की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कानून के सख्त प्रवर्तन के साथ-साथ समुदाय स्तर पर शिक्षा और जागरूकता बेहद जरूरी है, ताकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

यह घटनाक्रम समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य से समझौता किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं हो सकता।