ताइवान ने चीन की नीतियों और उसके वैश्विक प्रभाव बढ़ाने के इरादों को लेकर कड़ा बयान दिया है। ताइवान के उप विदेश मंत्री ने चीन की महत्वाकांक्षाओं की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध से पहले नाजी जर्मनी के कदमों से की है।
ताइवान का कहना है कि चीन उसके सेमीकंडक्टर और कंप्यूटर चिप उद्योग पर नियंत्रण पाना चाहता है। यह वही रणनीति है जैसी नाजी जर्मनी ने युद्ध से पहले चेकोस्लोवाकिया और उसके हथियार उद्योग पर कब्ज़ा जमाने के लिए अपनाई थी। ताइवान का मानना है कि अगर चीन अपने लक्ष्य में सफल होता है तो वह पूरे विश्व को तकनीकी और आर्थिक रूप से बंधक बना सकता है।
ताइवान ने यह भी चेताया है कि चीन सिर्फ एशिया-प्रशांत क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि उसकी नीतियां पूरी दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करेंगी। यह चुनौती केवल ताइवान की नहीं बल्कि लोकतांत्रिक देशों के लिए सामूहिक खतरा है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच व्यापार और कूटनीतिक संबंधों को लेकर तनाव है। ताइवान ने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ को चेताया है कि चीन की रणनीति को हल्के में लेना भविष्य में गंभीर परिणाम ला सकता है।