तस्मानियाई राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। विपक्ष के नेता डीन विंटर को पार्टी ने नेतृत्व पद से हटा दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब उन्होंने प्रीमियर जेरेमी रॉकलिफ़ के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुरी तरह असफल कर दिया।
कॉकस बैठक में हुए मतदान के बाद क्लार्क के सांसद जोश विली को लेबर का नया नेता चुना गया। उन्होंने अपनी ही साथी सांसद एला हद्दाद को हराकर नेतृत्व हासिल किया। विली ने कहा—
“यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। मैं पूरी मेहनत और निष्ठा से काम करूंगा ताकि लेबर को फिर से सत्ता में लौटाया जा सके।”
नए नेता ने अपने पूर्ववर्ती डीन विंटर का धन्यवाद करते हुए कहा कि वे हमेशा मज़बूत लेबर मूल्यों के लिए खड़े रहे। वहीं, जैनी फिनले को बिना विरोध के पार्टी की नई उपनेता चुना गया, जिन्होंने अनिता डॉव की जगह ली।
इस बदलाव की पृष्ठभूमि संसद में मिली बड़ी हार रही। तस्मानिया की 35 सदस्यीय विधानसभा में लेबर का अविश्वास प्रस्ताव किसी भी क्रॉस-बेंच सांसद का समर्थन नहीं जुटा पाया।
नवनिर्वाचित फ्रैंकलिन सांसद और पूर्व पत्रकार पीटर जॉर्ज ने लेबर की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी अल्पमत सरकार चलाने की तैयारी और क्षमता दोनों से ही दूर है।
प्रीमियर जेरेमी रॉकलिफ़ ने भी विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अल्पमत सरकार में सहयोग और संवाद की आवश्यकता है, लेकिन विंटर ने संसद को “वापस वहीं ला खड़ा किया, जहां पहले थे।”
ग्रीन पार्टी की नेता रोसाली वुड्रफ ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी को न तो लिबरल पर भरोसा है और न ही लेबर पर। उन्होंने आरोप लगाया कि विंटर ने कभी समझौते और वार्ता की इच्छा नहीं दिखाई। खासकर, अरबों डॉलर के नए स्टेडियम प्रोजेक्ट पर लेबर का अडिग समर्थन उनकी आलोचना का कारण बना।
जुलाई में हुए अचानक बुलाए गए चुनाव में लेबर को सिर्फ 10 सीटें मिलीं, जबकि लिबरल को 14 सीटें हासिल हुईं। किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण रॉकलिफ़ को प्रीमियर नियुक्त किया गया।