ऑस्ट्रेलिया में एक साधारण से लंच बॉक्स को लेकर मां और शिक्षक के बीच विवाद ने सोशल मीडिया पर तगड़ी बहस छेड़ दी है। मामला तब सामने आया जब एक सिंगल मदर ने शिकायत की कि उनके बच्चे के शिक्षक ने बिना पूछे नए लंच बैग पर स्थायी मार्कर से नाम लिख दिया।
महिला ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उन्होंने अपने बेटे के लिए कई अलग-अलग लंच बॉक्स खरीदे थे ताकि बच्चा अपनी पसंद चुन सके। बाकी लंच बॉक्स वह बेचने की योजना बना रही थीं। लेकिन जब बच्चा स्कूल से लौटा, तो लंच बैग पर काले मार्कर से लिखा हुआ नाम देखकर वह दंग रह गईं।
महिला का कहना था – “मैंने अभी तय नहीं किया था कि इसे रखना है या नहीं। अब इस पर स्थायी निशान लग गया है। यह बिल्कुल भी सराहनीय काम नहीं है।”
महिला की इस शिकायत पर इंटरनेट पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ आईं।
शिक्षकों का समर्थन करने वाले: कई लोगों ने कहा कि शिक्षक ने सही किया, क्योंकि लंच बॉक्स पर नाम होना बेहद ज़रूरी है। स्कूल में दर्जनों बच्चे होते हैं और बिना नाम के सामान की पहचान करना मुश्किल होता है। साथ ही, बच्चों में एलर्जी जैसी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए खाने-पीने की चीज़ों का गड़बड़ होना खतरनाक हो सकता है।
मां का पक्ष लेने वाले: वहीं कुछ लोगों ने महिला का समर्थन करते हुए कहा कि किसी की निजी वस्तु पर बिना अनुमति स्थायी मार्कर से लिखना उचित नहीं है। उनका कहना था कि शिक्षक को पहले पूछना चाहिए था।
यह मुद्दा जल्दी ही सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद बन गया। एक ओर अभिभावक शिक्षक की कार्रवाई को ज़रूरी और व्यावहारिक मान रहे हैं, तो दूसरी ओर लोग इसे निजी संपत्ति में हस्तक्षेप बता रहे हैं।
लंच बॉक्स पर नाम लिखने जैसे छोटे से कदम ने ऑस्ट्रेलिया में बच्चों की सुरक्षा, अभिभावकों के अधिकार और शिक्षकों की ज़िम्मेदारियों को लेकर व्यापक बहस खड़ी कर दी है। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि छोटी-छोटी बातों में भी संवाद और सहमति कितनी अहम होती है।