ऑस्ट्रेलिया पोस्ट से टकराव चरम पर, छोटे कारोबारी बोले – ‘हजारों डॉलर का नुकसान झेल रहे हैं’

ऑस्ट्रेलिया पोस्ट से टकराव चरम पर, छोटे कारोबारी बोले – ‘हजारों डॉलर का नुकसान झेल रहे हैं’

ब्रिस्बेन, 16 जनवरी 2026
ऑस्ट्रेलिया भर के छोटे व्यवसायों और ऑस्ट्रेलिया पोस्ट के बीच तनाव अब खुलकर सामने आ गया है। छोटे कारोबारी आरोप लगा रहे हैं कि डाक विभाग की नीतियाँ एकतरफा हैं और इसके कारण उन्हें हर साल हजारों डॉलर का अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कई व्यवसायों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया पोस्ट पार्सल भेजे जाने के हफ्तों बाद यह दावा करता है कि डाक शुल्क कम चुकाया गया था और अतिरिक्त राशि वसूल ली जाती है, लेकिन यदि कभी शुल्क अधिक चुका दिया जाए तो उसकी कोई सूचना या रिफंड नहीं दिया जाता।

यह मुद्दा तब और गरमा गया जब ब्रिस्बेन की ई-कॉमर्स उद्यमी एमी सिम्पसन ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा किया। वह ‘पैडिंगटन पैंट्री’ नामक गॉरमेट गिफ्टवेयर ब्रांड चलाती हैं।

एमी का दावा है कि पिछले क्रिसमस सीजन के दौरान उन्हें ऑस्ट्रेलिया पोस्ट से 26 अलग-अलग नोटिस मिले, जिनमें कथित रूप से कम डाक शुल्क चुकाने के लिए अतिरिक्त भुगतान की मांग की गई थी।
हालांकि, उन्हें एक भी बार यह सूचना नहीं मिली कि किसी पार्सल पर उन्होंने अधिक शुल्क चुका दिया हो।

एमी सिम्पसन का कहना है,
“हम मानते हैं कि कभी-कभी गलती से वजन या साइज कम दर्ज हो जाता है। सैकड़ों ऑर्डर पैक करते समय ऐसा होना स्वाभाविक है।
लेकिन यह जानकर हैरानी हुई कि कभी भी हमें यह नहीं बताया गया कि हमने ज़्यादा भुगतान किया है, जबकि ऐसा भी होता है।”

एमी का व्यवसाय पूरी तरह ऑनलाइन है और वह देशभर में खाद्य उत्पाद भेजती हैं। उनके अनुसार, शिपिंग लागत पहले से ही सबसे बड़ा खर्च है।

उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी ₹99 डॉलर से अधिक की खरीद पर मुफ्त डिलीवरी देती है, जबकि कई बार एक बड़े और भारी पार्सल को भेजने में 15 से 20 डॉलर या उससे अधिक खर्च आ जाता है।

“अगर मैं हर बार ग्राहकों से असली डिलीवरी चार्ज लूँ, तो चेकआउट पर ही बिक्री खत्म हो जाएगी। इसलिए हमें खुद यह खर्च उठाना पड़ता है। ज़्यादातर छोटे व्यवसाय ऐसा ही करते हैं,” उन्होंने कहा।

ऐसे में अचानक आने वाले अतिरिक्त शुल्क छोटे व्यापारियों के लिए और भी मुश्किल पैदा कर देते हैं।

एमी ने कहा,
“पहले से ही मुनाफा बहुत कम होता है। प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए हम डिलीवरी सब्सिडी देते हैं। ऐसे में बिना चेतावनी के आने वाले अतिरिक्त शुल्क बहुत बड़ा बोझ बन जाते हैं।”

उन्होंने बताया कि हर शुल्क को चुनौती देना लगभग असंभव है।
“हफ्तों बाद पुराने ऑर्डर निकालना, सबूत जुटाना और 8 डॉलर की राशि के लिए एक घंटे फोन पर बिताना व्यावहारिक नहीं है।”

उनकी पोस्ट के बाद सैकड़ों छोटे व्यवसाय मालिकों ने भी इसी तरह के अनुभव साझा किए।

कई कारोबारियों ने बताया कि वे अब जानबूझकर पार्सल का वजन और साइज ज़्यादा दर्ज करते हैं ताकि बाद में जुर्माना न लगे, भले ही इसके लिए उन्हें अधिक भुगतान क्यों न करना पड़े।

कुछ ने तो हर पैकेट को तराजू पर रखकर फोटो लेने की बात कही, ताकि बाद में सबूत के तौर पर दिखाया जा सके।

एक व्यवसायी ने लिखा,
“हमें यह साबित करना पड़ता है कि उनका दावा गलत है, लेकिन उन्हें यह साबित करने की कोई ज़रूरत नहीं कि वे सही हैं।”

यह मामला अब ऑस्ट्रेलिया में छोटे कारोबारियों के बीच बड़ी बहस का रूप ले चुका है और डाक सेवाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।