नई दिल्ली/पटना, 9 जुलाई 2025
देशभर में आज एक ओर श्रमिक संगठनों ने देशव्यापी भारत बंद का आह्वान किया है, वहीं बिहार में विपक्षी दल मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के खिलाफ चक्का जाम कर रहे हैं। इस राजनीतिक और सामाजिक उठापटक के बीच देश के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है।
25 करोड़ से ज्यादा श्रमिक होंगे बंद का हिस्सा
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने निजीकरण, श्रमिक अधिकारों पर पाबंदी और चार लेबर कोड रद्द करने की मांग को लेकर भारत बंद का आयोजन किया है। ट्रेड यूनियनों के मुताबिक, इस हड़ताल में 25 करोड़ से अधिक श्रमिक शामिल होंगे।
इस हड़ताल का असर बैंकों, बीमा, डाकघरों, कोयला खदानों, निर्माण और परिवहन सेवाओं पर पड़ेगा। विशेष रूप से सरकारी और सहकारी बैंक, पोस्ट ऑफिस, राज्य परिवहन बसें और बीमा कंपनी कार्यालय बंद रह सकते हैं। हालांकि रेलवे और पर्यटन सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा गया है ताकि बुनियादी सेवाओं पर कम से कम असर पड़े।
ट्रेड यूनियनों की प्रमुख मांगें:
चार लेबर कोडों को वापस लिया जाए
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण रोका जाए
मनरेगा जैसे ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों को मजबूत किया जाए
न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जाए
बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ विपक्ष का मोर्चा
बिहार में विपक्षी गठबंधन ने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के खिलाफ चक्का जाम का ऐलान किया है। विपक्ष का आरोप है कि निर्वाचन आयोग द्वारा मांगे गए 11 दस्तावेज गरीब तबकों के पास नहीं हैं, जिससे करोड़ों नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं।
इस मुद्दे को लेकर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव समेत महागठबंधन के सभी प्रमुख नेता सड़क पर उतरेंगे।
पटना में विरोध मार्च
आज सुबह 9:30 बजे पटना के आयकर गोलंबर से मुख्य निर्वाचन कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला जाएगा। विरोधी दल पुनरीक्षण प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग करेंगे। महागठबंधन का कहना है कि यह प्रक्रिया आगामी विधानसभा चुनावों के बाद कराई जाए ताकि किसी भी वर्ग का मतदान अधिकार छिन न जाए।
जनजीवन पर संभावित असर
बिहार बंद के कारण राज्य की सड़कों पर चक्का जाम की संभावना है, जिससे यातायात और राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, पूरे देश में ट्रेड यूनियन की हड़ताल से कई महत्वपूर्ण सेवाएं ठप हो सकती हैं।
पिछली हड़तालों से अलग
ट्रेड यूनियन नेता बताते हैं कि इस बार का भारत बंद इसलिए खास है क्योंकि यह मजदूरों और किसानों के संयुक्त मंच से हो रहा है। पिछले वर्षों (2020, 2022, 2024) में भी कई हड़तालें हो चुकी हैं, लेकिन इस बार का स्वरूप अधिक व्यापक और संगठित माना जा रहा है।
सरकार की ओर से अब तक इस हड़ताल या बिहार बंद को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।