अमेरिकी कटौती से मेडिकल रिसर्च पर संकट, प्रोजेक्ट ठप और स्टाफ की छंटनी

अमेरिकी कटौती से मेडिकल रिसर्च पर संकट, प्रोजेक्ट ठप और स्टाफ की छंटनी

सिडनी/वॉशिंगटन।
अमेरिका की ओर से मेडिकल रिसर्च अनुदानों में की गई कटौती का असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों की रिसर्च संस्थाओं को अपने महत्वपूर्ण शोध कार्यों को निलंबित करना पड़ा है, और कई कर्मचारियों को नौकरी से हटाना पड़ा है।

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से की गई इस नीतिगत कटौती को स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने "विज्ञान के बीच में बम फेंकने जैसा" करार दिया है। अमेरिका अब तक विश्वभर में चिकित्सा शोध का सबसे बड़ा फंडिंग स्रोत रहा है, लेकिन हाल के बदलावों के चलते कई स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थान संकट में आ गए हैं।

सिडनी स्थित एक प्रमुख मेडिकल रिसर्च संस्थान के निदेशक ने कहा, "हमारे कई प्रोजेक्ट अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की फंडिंग पर निर्भर थे। अब हमें न केवल रिसर्च रोकनी पड़ी है, बल्कि अपने कुशल वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों को भी विदा करना पड़ा है।"

इस कटौती का सबसे बड़ा असर उन अनुसंधानों पर पड़ रहा है जो कैंसर, अल्जाइमर, दुर्लभ बीमारियों और महामारी संबंधी परियोजनाओं से जुड़े हैं। कई संस्थाएं अब वैकल्पिक फंडिंग स्रोतों की तलाश में हैं लेकिन यह प्रक्रिया समय और संसाधनों की मांग करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अनपेक्षित और अचानक हुई कटौतियां न केवल वर्षों की मेहनत पर पानी फेर देती हैं, बल्कि चिकित्सा विज्ञान की वैश्विक प्रगति को भी धीमा कर सकती हैं। उन्होंने इस कदम को मानवता की भलाई के खिलाफ बताया और विश्व समुदाय से अपील की है कि चिकित्सा अनुसंधान को राजनीति से अलग रखा जाए।

निष्कर्षतः, वैज्ञानिक समुदाय इस फैसले से बेहद निराश है और इसे स्वास्थ्य अनुसंधान क्षेत्र में एक गंभीर झटका मान रहा है, जिसकी भरपाई में वर्षों लग सकते हैं।