वॉशिंगटन।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक असाधारण कदम उठाते हुए अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ 10 अरब अमेरिकी डॉलर का दीवानी मुक़दमा दायर किया है। यह मुक़दमा उनके और उनके बेटों—डोनाल्ड जूनियर तथा एरिक ट्रंप—द्वारा दाख़िल किया गया है। आरोप है कि आंतरिक राजस्व सेवा (IRS) के एक पूर्व कर्मचारी ने वर्षों पहले ट्रंप की गोपनीय कर जानकारी अवैध रूप से लीक की थी।
जिस कर्मचारी पर कर विवरण लीक करने का आरोप है, उसे पहले ही इस अपराध में पाँच साल की सज़ा सुनाई जा चुकी है। इसके बावजूद ट्रंप परिवार ने तर्क दिया है कि इस कृत्य से उन्हें गंभीर आर्थिक और प्रतिष्ठात्मक क्षति हुई, जिसके लिए वे अब अमेरिकी करदाताओं से अरबों डॉलर का हर्जाना चाहते हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने अपने टैक्स रिटर्न सार्वजनिक करने की परंपरा तोड़ दी थी। उन्होंने दावा किया था कि उनके टैक्स दस्तावेज़ ऑडिट के अधीन हैं, इसलिए उन्हें जारी नहीं किया जा सकता। बाद में लीक हुई जानकारियों से सामने आया कि कुछ वर्षों में उन्होंने आयकर के रूप में कोई भुगतान नहीं किया था और कर देनदारी कम करने के कई तरीक़े अपनाए गए थे।
इस घटनाक्रम के बीच एक अन्य विवाद भी सामने आया है। राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गैबार्ड की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें वह जॉर्जिया राज्य के एक चुनाव केंद्र पर एफबीआई की छापेमारी के दौरान मौजूद दिखाई दे रही हैं। इस कार्रवाई में वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े सैकड़ों मतपेटियों के दस्तावेज़ जब्त किए गए।
ट्रंप अब भी 2020 का चुनाव हारने को स्वीकार नहीं करते और लगातार चुनाव में धांधली के आरोप लगाते रहे हैं, हालांकि इन दावों के समर्थन में अब तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। ऐसे में खुफिया निदेशक की इस कार्रवाई में मौजूदगी को लेकर कांग्रेस के कई सदस्यों ने सवाल उठाए हैं और उनसे स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति द्वारा अपनी ही सरकार पर मुक़दमा दायर करना और संघीय एजेंसियों की कार्रवाइयों में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका, अमेरिकी लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर गंभीर बहस को जन्म दे सकती है।