अलास्का के सबसे बड़े अमेरिकी सैन्य ठिकाने एल्मेंडोर्फ एयरबेस पर शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बहुप्रतीक्षित मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। करीब तीन घंटे चली इस बंद कमरे की वार्ता में यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की संभावनाओं और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
एल्मेंडोर्फ एयरबेस का अपना खास इतिहास है। शीत युद्ध के दौरान इसे सोवियत संघ की गतिविधियों पर निगरानी रखने के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता था। यही वजह है कि यहां पर ट्रंप और पुतिन की बैठक को प्रतीकात्मक महत्व भी मिला। इस जगह का चयन दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद संवाद की संभावना का संकेत माना जा रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप विशेष विमान से वॉशिंगटन से अलास्का पहुंचे, जबकि पुतिन मॉस्को से सीधे यहां आए। एयरबेस पर पहुंचते ही दोनों नेताओं के बीच उल्लेखनीय गर्मजोशी देखने को मिली। पुतिन, ट्रंप की लिमोज़िन में उनके साथ बैठे, जो यह दर्शाता है कि बैठक से पहले ही माहौल अपेक्षाकृत सकारात्मक था।
वार्ता में दोनों देशों से तीन-तीन शीर्ष प्रतिनिधि मौजूद रहे। अमेरिकी पक्ष से विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जबकि रूसी पक्ष से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव शामिल हुए। इन नेताओं की मौजूदगी से साफ है कि चर्चा केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं थी, बल्कि नीति निर्धारण के स्तर तक जाने की मंशा थी।
सूत्रों के अनुसार, बैठक का अधिकांश समय यूक्रेन में जारी युद्ध और उसके संभावित समाधान पर केंद्रित रहा। अमेरिका और रूस के बीच इस मुद्दे पर गहरे मतभेद हैं, लेकिन दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। पुतिन के दूत किरिल दिमित्रिएव ने रूसी सरकारी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स को बताया कि बैठक “काफी अच्छी” रही, हालांकि किसी ठोस समझौते का खुलासा नहीं किया गया।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब यूक्रेन में जंग लंबी खिंच चुकी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय किसी भी संभावित शांति पहल को उत्सुकता से देख रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अलास्का की यह वार्ता भले ही निर्णायक न रही हो, लेकिन यह भविष्य में होने वाली कूटनीतिक कोशिशों की दिशा तय कर सकती है।
अब दुनिया की नजर इस पर है कि ट्रंप और पुतिन की यह पहल क्या यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने की ठोस राह खोल पाएगी, या यह केवल एक प्रतीकात्मक संवाद बनकर रह जाएगी।