नई दिल्ली, 6 सितंबर 2025
भारत और अमेरिका के रिश्ते हाल के महीनों में उतार-चढ़ाव से गुज़रे हैं। व्यापारिक विवाद, टैरिफ की तलवार और भू-राजनीतिक समीकरणों ने दोनों देशों की दोस्ती को ठंडा कर दिया था। लेकिन अब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आए सकारात्मक संदेश ने कूटनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
कुछ ही दिन पहले ट्रंप ने भारत पर “गहरे, अंधेरे चीन” से नज़दीकी बढ़ाने का आरोप लगाते हुए तीखी टिप्पणी की थी और भारतीय उत्पादों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने का ऐलान भी कर दिया था। यह बयान भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव का कारण बना।
लेकिन अचानक ही ट्रंप का स्वर बदल गया। उन्होंने पीएम मोदी को “महान नेता” और “महान मित्र” बताते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते हमेशा “विशेष” रहे हैं। यह बदलाव उनके पिछले बयान से बिलकुल विपरीत था और इसे कूटनीति का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
ट्रंप की इस प्रशंसा पर भारत सरकार ने संयमित लेकिन गर्मजोशी से प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वे अमेरिका के साथ "रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने" के लिए प्रतिबद्ध हैं और ट्रंप की भावनाओं का “पूर्ण रूप से प्रत्युत्तर” देंगे।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा कि यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों में भरोसा और सहयोग को पुनर्जीवित करने में मदद करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहते हुए सभी वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखेगा।
भारत और अमेरिका के संबंध अक्सर “प्यार और खींचतान” की कूटनीतिक परिभाषा के दायरे में रहे हैं।
ट्रेड और टैरिफ: हाल के दिनों में अमेरिका ने भारतीय स्टील, दवा और टेक उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया था।
भूराजनीतिक दबाव: अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से दूरी बनाए और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने में उसका मज़बूत साझेदार बने।
सैन्य सहयोग: रक्षा सौदे, तकनीकी साझेदारी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संयुक्त रणनीति, रिश्तों की मज़बूत नींव हैं।
यही कारण है कि तनाव के बावजूद रिश्तों की डोर कभी टूटी नहीं और आज भी दोनों देश रणनीतिक साझेदार हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह “यू-टर्न” उनकी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
एक ओर वे घरेलू मोर्चे पर “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडा को मज़बूत करने के लिए सख्त बयान देते हैं,
दूसरी ओर भारत जैसे उभरते बाज़ार और ताक़तवर लोकतंत्र से दूरी बनाना उनके लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है।
यही कारण है कि आलोचना और टैरिफ वार के बाद भी वे रिश्तों में “गरमाहट” बनाए रखने के संकेत दे रहे हैं।
कूटनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बयान दोनों देशों के लिए रिश्तों को पटरी पर लाने का अवसर है।
व्यापार: टैरिफ विवाद पर समाधान की संभावना बढ़ सकती है।
सुरक्षा: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को संतुलित करने के लिए भारत-अमेरिका सहयोग मज़बूत हो सकता है।
तकनीक और निवेश: एआई, रक्षा उत्पादन और डिजिटल अर्थव्यवस्था में साझेदारी की नई खिड़कियां खुल सकती हैं।
ट्रंप की ओर से मोदी की तारीफ़ केवल शब्दों का खेल है या वाकई रिश्तों को नई दिशा देने की पहल—यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल इतना तय है कि यह “सकारात्मक संदेश” भारत-अमेरिका संबंधों में जमी बर्फ को पिघलाने की शुरुआत कर सकता है।