वॉशिंगटन/तेहरान।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। हाल के घटनाक्रमों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयानों से यह संकेत मिल रहे हैं कि पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले घंटों में कोई बड़ा सैन्य या रणनीतिक कदम उठाया जा सकता है।
बीते 24 घंटों में सामने आई तीन अहम घटनाओं ने इस आशंका को और मजबूत किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर खुलकर समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने ईरानी जनता से अपील करते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखें और दमन करने वालों को जवाबदेह ठहराएं।
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा नहीं रुकती, तब तक ईरानी अधिकारियों के साथ सभी कूटनीतिक बैठकें स्थगित रहेंगी। इस बयान को अमेरिका की बदली हुई रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें कूटनीति के बजाय दबाव और प्रतिबंधों को प्राथमिकता दी जा रही है।
तनाव के बीच इज़राइल से भी अहम संकेत मिले हैं। इज़राइल की सुरक्षा कैबिनेट ने स्थानीय समयानुसार शाम 7 बजे एक आपातकालीन बैठक बुलाई, जिसका एकमात्र एजेंडा ईरान बताया गया।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, संभावित सैन्य खतरों और जवाबी रणनीतियों पर चर्चा हुई। इज़राइल पहले ही ईरान को अपने लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा मानता रहा है, ऐसे में इस बैठक को गंभीर घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच खाड़ी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में सैन्य गतिविधियों में भी इज़ाफा देखा गया है। हालांकि अमेरिका या उसके सहयोगियों की ओर से किसी बड़े अभियान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन रणनीतिक हलकों में इसे संभावित कार्रवाई की तैयारी माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात पर काबू नहीं पाया गया तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ सकता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें वॉशिंगटन, तेहरान और तेल अवीव पर टिकी हुई हैं।