वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका की आव्रजन नीति को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका में लगभग 40 वर्षों से रह रहे एक ईरानी मूल के व्यक्ति को अब ऑस्ट्रेलिया निर्वासित करने की तैयारी की जा रही है, जबकि उसका उस देश से कोई भी संबंध नहीं है।
52 वर्षीय रेज़ा ज़ाव्वार, जो वर्तमान में अमेरिकी राज्य मैरीलैंड में रहते हैं, को अमेरिका की आव्रजन एजेंसी ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट) ने 28 जून को उस समय गिरफ्तार कर लिया जब वह अपने पालतू कुत्ते को टहला रहे थे। अब अमेरिका उन्हें ऑस्ट्रेलिया या रोमानिया भेजना चाहता है, हालाँकि उनका इन दोनों देशों से कोई नाता नहीं है।
ज़ाव्वार 1980 के दशक में 12 वर्ष की आयु में अमेरिका आए थे और तब से वहीं रह रहे हैं। पहले उन्हें ग्रीन कार्ड प्राप्त था, लेकिन 2004 में 1990 के दशक में मादक पदार्थ (मारिजुआना) रखने के एक मामूली अपराध के चलते उनका स्थायी निवासी का दर्जा छीन लिया गया था। इसके बावजूद 2007 में एक अमेरिकी अदालत ने उन्हें ईरान वापस भेजने पर रोक लगा दी थी, यह कहते हुए कि वहाँ उन्हें उत्पीड़न का खतरा है।
उनकी वकील एवा बेनाच ने बताया, “रेज़ा को उसके पुराने मामूली मामलों के कारण निशाना बनाया जा रहा है। यह न केवल कानून का दुरुपयोग है, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी निंदनीय है।”
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग की प्रवक्ता ट्रिशिया मैकलॉघलिन ने ज़ाव्वार को “अवैध आपराधिक विदेशी” कहकर करार दिया और कहा कि "हम ऐसे अपराधियों के लिए अमेरिका में कोई जगह नहीं छोड़ेंगे।"
रेज़ा की माँ फिरूज़ेह फिरोज़ाबादी ने एक स्थानीय चैनल से बात करते हुए बताया कि जब अधिकारी उनके घर आए तो वह काँप रही थीं और उन्हें लगा कि शायद कोई दुर्घटना हो गई है।
रेज़ा को टेक्सास के एक निजी डिटेंशन सेंटर में रखा गया है, जबकि उनका परिवार उनकी रिहाई और अमेरिका में रहने की अनुमति के लिए अदालत में अपील करने की तैयारी कर रहा है। उनकी बहन मरयम ने एक ऑनलाइन याचिका शुरू की है जिसमें लिखा है, “रेज़ा को अमेरिका के अलावा कोई और घर नहीं जानता। वह पड़ोसियों की मदद करते हैं, ज़रूरतमंदों को खाना बाँटते हैं और एक शांतिप्रिय नागरिक हैं।”
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने स्पष्ट किया है कि उन्हें इस मामले में अमेरिका की ओर से कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया गया है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के कार्यालय की ओर से एक प्रवक्ता ने कहा, “इस मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन से कोई नया समझौता नहीं हुआ है।”
यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि अमेरिका द्वारा तीसरे देशों को निर्वासन की नीति अब तक मुख्यतः लैटिन अमेरिका और अफ्रीकी देशों पर केंद्रित रही है। ऑस्ट्रेलिया और रोमानिया का चुनाव आश्चर्यजनक है, और ज़ाव्वार के वकील समेत कई विशेषज्ञ इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ मान रहे हैं।
इस मुद्दे पर मानवाधिकार संगठनों और आव्रजन नीति विशेषज्ञों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है, जो इसे अमेरिकी कानून के मानवीय मूल्यों के विरुद्ध मानते हैं।