अमेरिका में H-1B वीजा लॉटरी सिस्टम खत्म!

अब सैलरी और टैलेंट होगा चयन का पैमाना, बड़ी कंपनियों और वरिष्ठ कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

अमेरिका में H-1B वीजा लॉटरी सिस्टम खत्म!

वॉशिंगटन, 24 सितंबर 2025
अमेरिका में लोकप्रिय और बहुप्रतीक्षित H-1B वीजा कार्यक्रम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इस दिशा में एक आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं और अब होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने इसका प्रस्ताव जारी किया है। इस प्रस्ताव के लागू होने पर मौजूदा लॉटरी प्रणाली समाप्त कर दी जाएगी और इसके स्थान पर एक वेतन आधारित चयन प्रक्रिया (Weighted Selection Process) अपनाई जाएगी।


अब तक कैसा था सिस्टम?

H-1B वीजा, अमेरिका की टेक इंडस्ट्री और अन्य सेक्टरों में विदेशी पेशेवरों के लिए सबसे अहम रास्ता रहा है। अब तक हर साल सीमित संख्या में वीजा आवंटित करने के लिए एक रैंडम लॉटरी प्रणाली अपनाई जाती थी। इसमें किसी भी योग्य उम्मीदवार को समान रूप से चयनित होने का अवसर मिलता था।

लेकिन नए प्रस्ताव के लागू होते ही यह "भाग्य" आधारित प्रणाली खत्म हो जाएगी और उम्मीदवारों की संभावना उनके वेतन स्तर के अनुसार तय होगी।


वेतन स्तर के हिसाब से प्राथमिकता

नए नियम के अनुसार, आवेदकों को उनकी सैलरी कैटेगरी के आधार पर सेलेक्शन पूल में शामिल किया जाएगा। इसमें चार वेतन स्तर बनाए गए हैं:

  • सबसे ऊंचा स्तर (लेवल 4) : लगभग $162,528 या उससे अधिक वेतन वाले उम्मीदवारों को पूल में चार बार एंट्री मिलेगी।

  • दूसरा स्तर (लेवल 3) : अपेक्षाकृत ऊंचा वेतन पाने वालों को तीन बार मौका।

  • तीसरा स्तर (लेवल 2) : मध्यम स्तर की सैलरी वालों को दो बार अवसर।

  • सबसे निचला स्तर (लेवल 1) : लगभग $70,000 सालाना या उससे कम आय वालों को सिर्फ एक बार एंट्री।

इस तरह, उच्च वेतन पाने वाले आवेदकों के चयन की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी।


किसे होगा फायदा और किसे नुकसान?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियम बड़ी टेक कंपनियों और स्थापित संस्थानों के पक्ष में झुकाव पैदा करेगा, क्योंकि वेतन संरचना वहां अधिक आकर्षक होती है।

  • फायदा :

    • गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों में काम करने वाले इंजीनियर और वरिष्ठ कर्मचारी।

    • उच्च वेतन और वर्षों का अनुभव रखने वाले विदेशी पेशेवर।

  • नुकसान :

    • हाल ही में ग्रेजुएट हुए युवा और करियर की शुरुआत करने वाले कर्मचारी।

    • स्टार्टअप्स और उभरती कंपनियां, जो अंतरराष्ट्रीय युवा टैलेंट पर निर्भर रहती हैं।

उदाहरण के तौर पर, मेटा में $1,50,000 वार्षिक वेतन पाने वाले इंजीनियर को चयन पूल में कई बार एंट्री मिलेगी, जबकि किसी स्टार्टअप में $70,000 कमाने वाले जूनियर डेवलपर को केवल एक बार ही अवसर मिलेगा।


विशेषज्ञों की राय

निकोल गुनारा, प्रमुख इमिग्रेशन अटॉर्नी (मैनिफेस्ट लॉ) का कहना है –
"यह प्रस्ताव अमेरिका की अर्थव्यवस्था में ग्लोबल टैलेंट के प्रवाह को पूरी तरह बदल सकता है। यह सिस्टम बड़ी कंपनियों के लिए तो लाभकारी है, लेकिन युवा और उभरते टैलेंट को नुकसान पहुंचा सकता है।"

उनके अनुसार, यह नीति न केवल टेक इंडस्ट्री की भर्ती प्रक्रिया को बदल देगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि भविष्य में अमेरिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा की प्रतिस्पर्धा में किस तरह की रणनीति अपनाता है।


व्यापक असर

  • टेक सेक्टर : वरिष्ठ और अनुभवी कर्मचारियों की मांग और बढ़ सकती है।

  • स्टार्टअप इकोसिस्टम : सस्ते और युवा अंतरराष्ट्रीय टैलेंट तक पहुंचना मुश्किल होगा।

  • ग्लोबल टैलेंट पूल : अमेरिका का रुख अब उच्च वेतन और अनुभवी पेशेवरों की ओर ज्यादा झुक सकता है।