नई दिल्ली।
नीति आयोग की ओर से जारी निर्यात तैयारी सूचकांक (Export Preparedness Index–EPI) 2024 में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए देश के शीर्ष पांच बड़े राज्यों में अपनी जगह बना ली है। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश इस सूचकांक में चौथे स्थान पर रहा, जबकि महाराष्ट्र 68.01 अंक के साथ पहले पायदान पर कायम है।
बुधवार को नई दिल्ली में जारी इस रिपोर्ट में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की निर्यात क्षमता, नीतिगत ढांचे और भविष्य की संभावनाओं का व्यापक आकलन किया गया है। इसका उद्देश्य राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा देना और निर्यात आधारित विकास को गति देना है।
ईपीआई 2024 के मुताबिक बड़े राज्यों की श्रेणी में
महाराष्ट्र पहले स्थान पर,
तमिलनाडु दूसरे,
गुजरात तीसरे,
उत्तर प्रदेश चौथे और
आंध्र प्रदेश पांचवें स्थान पर रहा।
यह सूचकांक वित्त वर्ष 2022 से 2024 के बीच राज्यों के निर्यात प्रदर्शन और उनकी तैयारियों पर आधारित है। रिपोर्ट में राज्यों को उनके प्रदर्शन के आधार पर लीडर्स, चैलेंजर्स और एस्पिरेंट्स जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।
छोटे राज्यों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की श्रेणी में उत्तराखंड ने पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद जम्मू-कश्मीर दूसरे और नागालैंड तीसरे स्थान पर रहे। यह रैंकिंग दर्शाती है कि पारंपरिक औद्योगिक राज्यों के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी निर्यात तैयारी लगातार मजबूत हो रही है।
ईपीआई 2024 का ढांचा चार प्रमुख स्तंभों के अंतर्गत 70 मापदंडों पर आधारित है। इनमें
निर्यात बुनियादी ढांचा,
नीति एवं शासन,
औद्योगिक एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र,
निर्यात प्रदर्शन
शामिल हैं।
इस संस्करण में लॉजिस्टिक्स, एमएसएमई, मानव पूंजी, लागत और वित्त तक पहुंच जैसे पांच नए आयाम जोड़े गए हैं, ताकि वैश्विक व्यापार के बदलते परिदृश्य के अनुरूप सूचकांक को अधिक प्रासंगिक बनाया जा सके।
नीति आयोग के अनुसार, यह सूचकांक केवल राज्यों की रैंकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक नीति मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगा। इससे राज्य अपनी कमजोरियों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठा सकेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्रयासों से केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय बनेगा और वैश्विक व्यापार में एमएसएमई की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
आयोग का मानना है कि डेटा-आधारित यह दृष्टिकोण आने वाले समय में भारत के निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने में अहम भूमिका निभाएगा।