प्रशांत क्षेत्र में चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। वानुअतु के पुलिस मंत्री एंड्रयू नापुआत ने ऑस्ट्रेलिया के प्रशांत मामलों और रक्षा उद्योग मंत्री पैट कॉनरॉय को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि उन्हें “अपने तथ्यों को सही करना चाहिए” और वानुअतु की आंतरिक प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए।
हाल ही में मंत्री एंड्रयू नापुआत बीजिंग पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने चीन के साथ एक सहमति ज्ञापन (MOU) पर काम करने की घोषणा की। इस संभावित समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच पुलिस सहयोग और सुरक्षा मामलों पर स्पष्टता लाना बताया जा रहा है।
यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब चीन प्रशांत क्षेत्र में तेजी से अपना प्रभाव बढ़ा रहा है और कई द्वीपीय देशों को विकास सहायता, पुलिस प्रशिक्षण तथा बुनियादी ढाँचे में निवेश का भरोसा दे रहा है।
पैट कॉनरॉय ने इस समझौते पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि “वानुअतु मंत्री का बयान कोई आश्चर्य की बात नहीं है। यह सिर्फ संभावनाओं की खोज है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऑस्ट्रेलिया वानुअतु की संप्रभुता का सम्मान करता है, लेकिन प्रशांत क्षेत्र में “सुरक्षा साझेदार की पहली पसंद” बने रहने की स्थायी प्रतिस्पर्धा में है।
कॉनरॉय की इस टिप्पणी से नाराज़ होकर एंड्रयू नापुआत ने ऑस्ट्रेलियाई मंत्री को जवाब देते हुए कहा,
“मैं अपने मित्र को सलाह दूंगा कि वे तथ्यों की पुष्टि करें। किसी मंत्री का बयान व्यक्तिगत राय नहीं बल्कि सरकार की प्रक्रिया का हिस्सा है। वानुअतु की आंतरिक चर्चाओं में बाहरी टिप्पणी से बचना चाहिए।”
यह विवाद उस समय सामने आया है जब ऑस्ट्रेलिया और वानुअतु के बीच 500 मिलियन डॉलर का ‘नाकामल सुरक्षा समझौता’ अधर में लटका हुआ है।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ हाल ही में पोर्ट विला पहुँचे थे, लेकिन आख़िरी समय में यह डील साइन नहीं हो सकी।
नापुआत ने साफ किया कि वानुअतु के मंत्रियों और सांसदों ने समझौते की भाषा (wordings) पर और चर्चा की मांग की है, विशेष रूप से उस हिस्से पर जिसमें अन्य देशों को भी बुनियादी ढाँचे की परियोजनाओं में योगदान देने की अनुमति मिलती है। माना जा रहा है कि यह बिंदु सीधे तौर पर चीन से जुड़ा हुआ है।
चीन पिछले कुछ वर्षों से वानुअतु की पुलिस को उपकरण और सहायता उपलब्ध करा रहा है। हाल ही में उसने करीब 6.42 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मूल्य के मोटरसाइकिल, ड्रोन और अन्य सुरक्षा उपकरण वानुअतु को भेंट किए।
दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया लगातार शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास परियोजनाओं में मदद देकर अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि प्रशांत क्षेत्र के छोटे द्वीपीय देशों के लिए अब बहु-पक्षीय साझेदारी और संतुलन साधना अहम हो गया है। वानुअतु की कोशिश है कि वह केवल एक देश पर निर्भर न रहे, बल्कि चीन और ऑस्ट्रेलिया दोनों के साथ संबंध बनाए रखे।