वेटिकन ने सोमवार को घोषणा की कि उसने अचल संपत्ति (रियल एस्टेट) से $110 मिलियन (लगभग 915 करोड़ रुपये) का लाभ कमाया है। इसे वह “बीते कई वर्षों का सबसे सफल बजट” बता रहा है। पोप फ्रांसिस के सुधारात्मक प्रयासों के बाद आए इस सकारात्मक आर्थिक परिणाम को वेटिकन ने बड़ी उपलब्धि बताया है।
अर्थव्यवस्था में नई जान
वेटिकन की प्रशासनिक इकाई, अपोस्टोलिक सी (Holy See), ने बताया कि साल 2024 में संपत्तियों की बिक्री और बेहतर निवेश रणनीतियों के चलते यह ऐतिहासिक लाभ संभव हो सका। रिपोर्ट के मुताबिक, वेटिकन की अधिकांश संपत्तियाँ इटली और लंदन जैसे शहरों में स्थित हैं, जिनकी कीमतें हाल के वर्षों में काफी बढ़ी हैं।
वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता का असर
वेटिकन के खजांची फादर एंटोनियो गुएरेरो ने कहा, “हम न केवल घाटे से उबरे हैं, बल्कि अब हमारे पास भविष्य की योजनाओं के लिए पर्याप्त पूंजी है। पोप फ्रांसिस द्वारा शुरू की गई पारदर्शिता और जवाबदेही की नीतियों का प्रत्यक्ष असर आज दिख रहा है।”
फ्रांसिस युग में मनी-लॉन्ड्रिंग का खुलासा
हालांकि इस आर्थिक सफलता के बीच एक काला साया भी सामने आया है। वेटिकन के आंतरिक जांच विभाग द्वारा हाल ही में पेश की गई रिपोर्ट में पोप फ्रांसिस के शासनकाल के शुरुआती वर्षों में चल रही मनी-लॉन्ड्रिंग योजनाओं का खुलासा हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ उच्च पदस्थ अधिकारी गुप्त रूप से विदेशी बैंकों में संदिग्ध फंड ट्रांसफर कर रहे थे। हालांकि, पोप ने उन पर नकेल कसते हुए जांच शुरू करवाई थी, जिसके चलते अब कई मामलों में अभियोजन की प्रक्रिया चल रही है।
आगे की राह
वेटिकन का यह वित्तीय पुनरुत्थान और साथ ही पिछली गलतियों की जवाबदेही एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यह दिखाता है कि संस्था न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधार रही है, बल्कि आत्मनिरीक्षण और सुधार की राह भी अपना रही है।
हिंदी गौरव की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटनाक्रम न केवल धार्मिक समुदायों बल्कि वैश्विक वित्तीय संस्थाओं के लिए भी एक मिसाल पेश करता है कि पारदर्शिता और नेतृत्व में दृढ़ता कैसे किसी संस्था की दिशा बदल सकती है।