सफेदपोश कर्मचारियों पर मंडरा रहा है खतरा: एआई और आर्थिक दबाव से नौकरी संकट और जटिल हुआ

सफेदपोश कर्मचारियों पर मंडरा रहा है खतरा: एआई और आर्थिक दबाव से नौकरी संकट और जटिल हुआ

ऑस्ट्रेलिया में नौकरी संकट अब और जटिल होता जा रहा है। जहां पहले मंदी का सबसे ज्यादा असर निर्माण और रिटेल जैसे ब्लू कॉलर क्षेत्रों पर पड़ता था, वहीं अब विशेषज्ञों का मानना है कि अगली बारी सफेदपोश यानी व्हाइट कॉलर कर्मचारियों की हो सकती है। इसका मुख्य कारण है कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का बढ़ता उपयोग और धीमा होता सरकारी भर्ती तंत्र।

ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश की बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है — जो कोविड के बाद की सबसे ऊंची दर है। न्यू साउथ वेल्स, क्वींसलैंड, वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया और नॉर्दर्न टेरिटरी में बेरोजगारी में खासा इज़ाफा हुआ है।

सफेदपोश नौकरी की जंग: बदलते रुझान

AMP के मुख्य अर्थशास्त्री शेन ओलिवर का कहना है कि ये संकट पहले से अलग है। उन्होंने बताया,

“अबकी बार मामला ज्यादा जटिल है। पारंपरिक मंदी में निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ता है, लेकिन इस बार सरकारी नौकरियों में गिरावट और AI की वजह से बदलाव देखने को मिल सकता है।”

AI अब तेजी से कॉर्पोरेट जगत का हिस्सा बन रहा है। कंपनियां लागत घटाने के लिए ऑटोमेशन और मशीन लर्निंग का सहारा ले रही हैं, जिससे एडमिन, डेटा एनालिसिस और कस्टमर सपोर्ट जैसी भूमिकाएं संकट में आ गई हैं।

इलाकों में भिन्नता: बेरोजगारी असमान रूप से फैली

सिडनी के वेस्ट (पाररामट्टा सहित) में बेरोजगारी दर 5.7 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि साउथ सिडनी (सदरलैंड क्षेत्र) में यह दर केवल 2.3 प्रतिशत है। मेलबर्न के इनर ईस्ट और साउथ में मामूली 0.2 प्रतिशत वृद्धि देखी गई, जबकि जीलॉन्ग जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बेहतर हुए हैं।

क्या आने वाले महीने व्हाइट कॉलर कर्मचारियों के लिए चुनौतीपूर्ण होंगे?

विशेषज्ञों की राय है कि जैसे-जैसे AI और ऑटोमेशन का प्रसार बढ़ेगा, वैसे-वैसे उच्च शिक्षित पेशेवरों की नौकरियों पर खतरा मंडराने लगेगा। यह संकट केवल आर्थिक नहीं, तकनीकी भी है — और इसका समाधान आसान नहीं होगा।