तेहरान, 1 मार्च 2026।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन की खबर के बाद पूरे मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। देश के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक पद के खाली होने के साथ ही यह सवाल उठने लगा है कि अब ईरान की कमान किसके हाथों में सौंपी जाएगी।
ईरान में सुप्रीम लीडर का पद केवल धार्मिक नेतृत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि सेना, न्यायपालिका, विदेश नीति और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मामलों पर अंतिम निर्णय का अधिकार भी इसी पद के पास होता है। ऐसे में नए सुप्रीम लीडर का चयन न सिर्फ ईरान बल्कि वैश्विक राजनीति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान के संविधान के अनुसार, सुप्रीम लीडर का चुनाव ‘असेम्बली ऑफ एक्सपर्ट्स’ नामक संस्था करती है। यह संस्था वरिष्ठ धर्मगुरुओं का एक समूह है, जो नए नेता के चयन पर अंतिम फैसला लेती है। आमतौर पर यह प्रक्रिया बंद दरवाजों के भीतर होती है और अंतिम नाम पर सहमति बनने के बाद ही आधिकारिक घोषणा की जाती है।
खामेनेई के निधन के बाद जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उनमें पहला नाम मोजतबा खामेनेई का है। मोजतबा, दिवंगत सुप्रीम लीडर के पुत्र हैं और लंबे समय से सत्ता के आंतरिक ढांचे में सक्रिय माने जाते रहे हैं। उन्हें कट्टर रुख और सुरक्षा तंत्र के साथ करीबी संबंधों के कारण मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरा प्रमुख नाम हसन खुमैनी का है, जो ईरान की इस्लामी क्रांति के संस्थापक आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के पोते हैं। हसन खुमैनी को अपेक्षाकृत संतुलित और सुधारवादी सोच का प्रतिनिधि माना जाता है। उनका धार्मिक कद और पारिवारिक विरासत उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए सुप्रीम लीडर के चयन में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका भी अहम हो सकती है। देश की सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में इस संगठन का प्रभाव काफी मजबूत है। इसलिए अंतिम फैसले में राजनीतिक और सैन्य शक्ति संतुलन महत्वपूर्ण रहेगा।
नए नेतृत्व के साथ ईरान की विदेश नीति, खासकर अमेरिका और इजरायल के साथ संबंधों में बदलाव की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। साथ ही घरेलू स्तर पर आर्थिक सुधार, सामाजिक नीतियां और विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी नई दिशा तय हो सकती है।
फिलहाल पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि ईरान की सर्वोच्च संस्था किसे देश की बागडोर सौंपती है। आने वाले दिनों में यह फैसला न केवल ईरान की राजनीति बल्कि पूरे क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है।