कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रीय ध्वज जलाने की प्रथा पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव संसद में असफल हो गया है। विपक्षी गठबंधन (कोएलिशन) द्वारा पेश किया गया यह संशोधन सरकार के समर्थन के बिना गिर गया, जिसके बाद ऑस्ट्रेलियाई झंडा जलाना कानूनी रूप से वैध बना रहेगा।
प्रधानमंत्री Anthony Albanese सहित सत्तारूढ़ Labor Party के अधिकांश सांसदों ने घृणा अपराध कानून (हेट क्राइम्स) में प्रस्तावित इस संशोधन के खिलाफ मतदान किया। सरकार ने इसे “राजनीतिक दिखावा” करार दिया और कहा कि मौजूदा विधेयक का उद्देश्य हालिया आतंकवादी घटनाओं के बाद समुदायों की सुरक्षा को मजबूत करना है, न कि प्रतीकात्मक मुद्दों पर दंडात्मक कानून बनाना।
क्वींसलैंड से सांसद और पूर्व सैनिक फिलिप थॉमसन ने सरकार के रुख की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि झंडा जलाना करोड़ों ऑस्ट्रेलियाइयों की भावनाओं का अपमान है। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रीय ध्वज सैनिकों के बलिदान, युद्ध में सेवा और शहीदों के सम्मान का प्रतीक है, और इसे कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।
थॉमसन का दावा है कि सर्वेक्षणों के अनुसार 77 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई नागरिक झंडा जलाने को अवैध घोषित किए जाने के पक्ष में हैं। उनके अनुसार यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं बल्कि जानबूझकर किया गया अपमान है।
हालाँकि यह मुद्दा विपक्ष के भीतर भी एकजुट नहीं कर सका। कुछ सांसदों ने झंडा जलाने पर जेल की सज़ा को अत्यधिक कठोर बताया। दक्षिण ऑस्ट्रेलिया से लिबरल सांसद एलेक्स एंटिक ने मतदान से दूरी बनाते हुए कहा कि वे इस कृत्य से असहमत हैं, लेकिन इसके लिए कारावास का समर्थन नहीं करते।
नेशनल पार्टी के अधिकांश सांसदों ने मतदान में भाग नहीं लिया, जबकि कुछ नेताओं ने पार्टी लाइन से हटकर सरकार के विधेयक का समर्थन किया। इससे विपक्षी गठबंधन में मतभेद और स्पष्ट हो गए।
प्रधानमंत्री अल्बानीज़ ने कहा कि संसद का ध्यान 14 दिसंबर को हुए यहूदी विरोधी आतंकवादी हमले के बाद की स्थिति पर होना चाहिए। उनके अनुसार, सरकार भविष्य में घृणास्पद भाषण और अन्य संबंधित मुद्दों पर व्यापक प्रक्रिया के तहत विचार करेगी, लेकिन फिलहाल मौजूदा कानून ही प्राथमिकता है।
ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून की सीमा को लेकर यह बहस फिलहाल थमती नहीं दिख रही। जहाँ एक ओर कुछ नेता इसे राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़ रहे हैं, वहीं सरकार का कहना है कि प्रतीकों की रक्षा से अधिक महत्वपूर्ण सामाजिक सौहार्द और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।