इस्राइल ने सीरिया पर हमले तेज कर दिए हैं, खासकर दमिश्क और उसके आसपास के प्रांतों में। यह कदम द्रुज समुदाय की सुरक्षा के लिए उठाया गया है, जो सीरिया की नई कट्टरपंथी सुन्नी सरकार और उसके समर्थक संगठनों से खतरों का सामना कर रहा है। आइए जानते हैं कौन हैं ये द्रुज, उनका इतिहास क्या है और इस्राइल उनके लिए क्यों सक्रिय हुआ है।
द्रुज अरबी भाषी मुस्लिम समुदाय हैं, जिनका इतिहास इस्माइली शिया संप्रदाय से जुड़ा है। 11वीं सदी में द्रुजों ने इस्लाम के अलावा ईसाई, यहूदी और हिंदू धर्मों की कुछ परंपराएं भी अपनाई। वे पुनर्जन्म और आत्मा के एक शरीर से दूसरे शरीर में जाने पर विश्वास करते हैं। द्रुज अल्पसंख्यक हैं और धर्मांतरण व बाहरी विवाह स्वीकार नहीं करते।
द्रुज समुदाय मुख्य रूप से दक्षिणी सीरिया, लेबनान, जॉर्डन और इस्राइल में रहता है। सीरिया में बाथ पार्टी के समय से द्रुजों का राजनीतिक और सैन्य प्रभाव रहा है। हाल ही में, बशर अल-असद के शासन के बाद जब सुन्नी कट्टरपंथी संगठन हयात तहरीर अल-शाम के अहमद अल-शरा ने सत्ता संभाली, तब द्रुजों पर हमलों की खबरें बढ़ीं।
द्रुजों ने सुवैदा में अपनी सुरक्षा के लिए छोटे स्तर की सेना बनाई है, लेकिन कट्टरपंथी हमले लगातार जारी हैं। ब्रिटेन स्थित सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, द्रुजों को चुन-चुन कर निशाना बनाया जा रहा है।
1967 के अरब-इस्राइल युद्ध के बाद इस्राइल ने गोलन हाइट्स पर कब्जा कर लिया था, जहां बड़ी संख्या में द्रुज रहते हैं। करीब 1.5 लाख द्रुज इस्राइल की नागरिकता लेते हुए वहां के साथ जुड़े हुए हैं। ये लोग इस्राइली सेना में भी सेवा देते हैं और यहूदी समुदाय से गहरा रिश्ता रखते हैं।
13 जुलाई को सुवैदा में स्थानीय बेदुइन कबायली द्रुजों पर हमले और अपहरण करने लगे। इस हिंसा में सीरियाई सरकारी बलों के शामिल होने की खबरों के बाद इस्राइल ने 15 जुलाई को पहली बार सुवैदा में हमला किया। इसके बाद 16 जुलाई को दमिश्क में राष्ट्रपति भवन के पास समेत कई संवेदनशील स्थलों को निशाना बनाया गया। इस्राइल के विदेश मंत्री इस्राइल काट्ज ने चेतावनी दी कि अब सिर्फ कड़ा जवाब मिलेगा।
इस्राइल का उद्देश्य द्रुजों की सुरक्षा के साथ-साथ सीरिया में कट्टरपंथी सुन्नी सरकार के बढ़ते प्रभाव को रोकना भी है। सीरिया की कमजोर आर्थिक और सैन्य स्थिति इस हमले को रोकने में बाधा बनेगी। वहीं, इस्राइल ने अब एक नया संघर्ष क्षेत्र खोला है, जो पहले से ही कई मोर्चों पर जूझ रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम से सीरिया में तनाव और बढ़ सकता है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर पड़ेगा। भविष्य में इस्राइल की रणनीति द्रुजों की सुरक्षा और सीमा सुरक्षा पर निर्भर रहेगी।