सिडनी, 11 दिसम्बर 2025
वूलवर्थ्स के एक 63 वर्षीय कर्मचारी को अपनी 34 वर्ष छोटी सहकर्मी को बार-बार प्रेम-भरे संदेश भेजने और अनुचित व्यवहार के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया है। यह विवाद उस समय सामने आया जब फेयर वर्क कमीशन (FWC) ने मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की।
रिपोर्ट के अनुसार, सिडनी के वेंटवर्थविल स्थित वूलवर्थ्स स्टोर में फल-सब्ज़ी विभाग के प्रबंधक रहे अलेक्ज़ पुषिक ने पिछले साल नवंबर में आयोजित क्रिसमस पार्टी के दौरान 29 वर्षीय सहकर्मी, मिस घिमिरे, के प्रति अनुचित रुचि दिखाई। पार्टी में उन्होंने न सिर्फ युवा कर्मचारी की ओर लगातार घूरा, बल्कि अचानक पास आकर उसकी तारीफ़ की और गाल पर किस भी कर दिया।
पीड़िता के अनुसार, दोनों के बीच इस कार्यक्रम से पहले कोई करीबी बातचीत या संपर्क नहीं था।
पार्टी के बाद पुषिक ने फेसबुक पर मिस घिमिरे को लगातार मैसेज भेजने शुरू कर दिए। इनमें “बहुत खूबसूरत”, “आई लव यू”, “क्या मैं तुम्हें बाहर ले जा सकता हूँ?” जैसे संदेश और दिल, किस, व प्यार दर्शाने वाले इमोजी शामिल थे।
युवती ने एक भी संदेश का जवाब नहीं दिया, इसके बावजूद मार्च और अप्रैल तक यह सिलसिला जारी रहा। उन्होंने उसके पुराने पोस्ट पर भी टिप्पणी की—एक टिप्पणी में लिखा, “Be my Valentine”।
FWC के दस्तावेज़ों के अनुसार, पुषिक ने स्टोर में भी कई बार निजी टिप्पणियाँ कीं—जैसे “तुम बहुत सुंदर लगती हो” और “मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर दूँगा”। एक अवसर पर, जब पीड़िता ने काम में मदद मांगी, तो उन्होंने यह टिप्पणी की, जिसे सुनकर दो अन्य सहकर्मी भी हैरान रह गए।
एक अन्य दिन, उन्होंने ड्यूटी खत्म होने पर युवती को ड्रिंक और कराओके के लिए चलने का दबाव डाला। जब उसने मना किया, तो उन्होंने उसके फेसबुक पर कराओके वीडियो देखने की बात कही, जिससे वह और अधिक असहज हो गई।
लगातार उत्पीड़न से तंग आकर मिस घिमिरे ने अप्रैल में स्टोर मैनेजर से शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि इस व्यवहार से वह तनाव में थीं, नींद नहीं आती थी और एक अंतरराष्ट्रीय छात्रा होने के नाते कानूनी प्रक्रिया में उलझने का डर भी था। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी चिंता थी कि एक रंगभेद झेलने वाली महिला होने के कारण उनकी बात शायद गंभीरता से न ली जाए।
कंपनी ने आंतरिक जांच के बाद मई में पुषिक को बर्खास्त कर दिया। इसके बाद उन्होंने अनुचित बर्खास्तगी का दावा करते हुए FWC में अपील की, पर आयोग ने पिछले महीने उनकी याचिका खारिज कर दी।
पुषिक का तर्क था कि उनके संदेश “प्रेमपूर्ण लेकिन हानिरहित” थे और इमोजी का गलत अर्थ लगाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि युवती “उनकी पोती जैसी” थी।
लेकिन FWC ने माना कि लगातार अनचाहे संदेश, टिप्पणी और दबाव स्पष्ट रूप से कार्यस्थल उत्पीड़न की श्रेणी में आते हैं।