तिब्बत पहुँचे राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ल्हासा से दिया “चीनी समाजवाद और एकता” का संदेश

तिब्बत पहुँचे राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ल्हासा से दिया “चीनी समाजवाद और एकता” का संदेश

ल्हासा, 21 अगस्त 2025 – चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग गुरुवार को तिब्बत की राजधानी ल्हासा पहुँचे और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने तिब्बत को “आधुनिक समाजवादी मॉडल” के रूप में पेश करते हुए मंदारिन भाषा, चीनी समाजवाद और जातीय एकता पर जोर दिया।

भव्य आयोजन

पोताला पैलेस के सामने हजारों लोगों की मौजूदगी में सांस्कृतिक कार्यक्रम, गीत-नृत्य और परेड का आयोजन हुआ। लोग हाथों में लाल झंडे और नारे लिए दिखाई दिए। मंच से शी ने कहा कि तिब्बत की स्थिरता और विकास चीन की एकता की मजबूती का प्रतीक है।

राजनीतिक संदेश

राष्ट्रपति शी ने अपने संबोधन में कहा कि तिब्बत को “राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक विकास, पारिस्थितिक संरक्षण और सीमा सुरक्षा” को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने जोर दिया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में ही तिब्बत प्रगति की राह पर आगे बढ़ सकता है।

विकास और उपलब्धियाँ

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2012 से 2024 के बीच तिब्बत का सड़क नेटवर्क दोगुना होकर 1.2 लाख किलोमीटर तक पहुँच गया है। 2024 में क्षेत्र की जीडीपी 276.5 अरब युआन तक पहुँचने का दावा किया गया। शी ने कहा कि यह उपलब्धियाँ तिब्बत की जनता की मेहनत और पार्टी की नीतियों का परिणाम हैं।

मानवाधिकार और विवाद

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और निर्वासित तिब्बतियों का कहना है कि चीन इस विकास मॉडल के नाम पर धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान को दबा रहा है। वे इसे तिब्बती भाषा, परंपरा और धर्म पर नियंत्रण बढ़ाने की कवायद मानते हैं। चीन इन आरोपों को खारिज करता है और इसे “स्थिरता और समृद्धि” का रास्ता बताता है।

भारत और क्षेत्रीय संकेत

यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब चीन की विदेश मंत्री वांग यी भारत यात्रा पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शी जिनपिंग का यह कदम भारत को अप्रत्यक्ष संदेश भी है, खासकर सीमा और दलाई लामा उत्तराधिकार के सवाल पर। चीन का कहना है कि अगले दलाई लामा की नियुक्ति पर उसका अधिकार होगा, जिस पर भारत और निर्वासित तिब्बती समुदाय लगातार आपत्ति जताते रहे हैं।


👉 निष्कर्ष: शी जिनपिंग का यह दौरा तिब्बत के लिए एक विकास का वादा तो है, लेकिन इसके पीछे गहरा राजनीतिक संदेश भी छिपा है। यह दौरा चीन की उस रणनीति को रेखांकित करता है जिसमें तिब्बत को न केवल आंतरिक एकता बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शक्ति प्रदर्शन के केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।