मुंबई। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के नए अध्यक्ष के रूप में जम्मू-कश्मीर के पूर्व क्रिकेटर और अनुभवी बल्लेबाज मिथुन मनहास का चयन किया गया है। यह भारतीय क्रिकेट इतिहास का अनोखा क्षण है, क्योंकि पहली बार जम्मू-कश्मीर से कोई खिलाड़ी इस शीर्ष पद तक पहुँचा है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस उपलब्धि पर मनहास को बधाई देते हुए इसे “ऐतिहासिक और गर्व का क्षण” करार दिया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी साझा करते हुए लिखा—
“मिथुन मनहास को आधिकारिक तौर पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का नया अध्यक्ष घोषित किया गया है। जम्मू और कश्मीर के डोडा जिले के लिए यह अभूतपूर्व गौरव का क्षण है। कुछ ही घंटों के भीतर दो बड़ी खुशखबरी आई हैं। पहले किश्तवाड़ की बेटी शीतल ने विश्व चैंपियन बनकर देश का मान बढ़ाया और अब मिथुन ने बीसीसीआई अध्यक्ष पद सँभालकर इतिहास रच दिया।”
45 वर्षीय मनहास घरेलू क्रिकेट में एक बड़ा नाम रहे हैं। उन्होंने 1997-98 से 2016-17 तक लगभग दो दशकों तक दिल्ली टीम की ओर से क्रिकेट खेला। उनके नाम 157 फर्स्ट क्लास मुकाबलों में 9714 रन दर्ज हैं। इसके अलावा उन्होंने 130 लिस्ट ए और 91 टी20 मैचों में भी हिस्सा लिया।
हालाँकि, भारतीय राष्ट्रीय टीम में उन्हें जगह नहीं मिल सकी, लेकिन आईपीएल में उन्होंने दिल्ली डेयरडेविल्स, पुणे वॉरियर्स और चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलकर अपनी पहचान बनाई। हाल के वर्षों में वे जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) के प्रशासक, दलीप ट्रॉफी के लिए नॉर्थ जोन संयोजक और आईपीएल टीम गुजरात टाइटंस के सपोर्ट स्टाफ के सदस्य भी रहे हैं।
मनहास ने रॉजर बिन्नी की जगह ली है। बीसीसीआई के नियमों के अनुसार किसी भी पदाधिकारी की अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष तय है। इसी कारण बिन्नी को पद छोड़ना पड़ा।
सूत्रों के अनुसार, इस पद की दौड़ में पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह और कर्नाटक के रघुराम भट्ट भी शामिल थे, लेकिन अंततः मनहास पर सर्वसम्मति बनी। नई कमेटी का ऐलान बीसीसीआई की वार्षिक आम बैठक (AGM) में औपचारिक रूप से किया गया।
इस बार बीसीसीआई में कई अन्य अहम पदों पर भी बदलाव हुए हैं—
राजीव शुक्ला को फिर से उपाध्यक्ष बनाया गया है।
देवजीत सैकिया सचिव पद पर बने रहेंगे।
रघुराम भट्ट कोषाध्यक्ष चुने गए।
प्रभतेज सिंह भाटिया को संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है।
मिथुन मनहास की नियुक्ति को भारतीय क्रिकेट के लिए एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्व खिलाड़ी के नेतृत्व में बोर्ड और अधिक खिलाड़ी-केंद्रित नीतियों को अपनाएगा।
उनसे यह उम्मीद की जा रही है कि वे—
युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए योजनाएँ तैयार करेंगे।
घरेलू टूर्नामेंटों की गुणवत्ता को और मज़बूत करेंगे।
भारतीय क्रिकेट को विश्व क्रिकेट में और अधिक प्रभावशाली बनाएँगे।
यह नियुक्ति न केवल भारतीय क्रिकेट बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए गर्व का विषय है। डोडा से निकलकर बीसीसीआई अध्यक्ष पद तक पहुँचना इस बात का प्रतीक है कि प्रतिभा और समर्पण से कोई भी खिलाड़ी देश के सबसे बड़े मंच तक पहुँच सकता है।